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Showing posts from May 21, 2018

बीमार पड़ने के पहले रोज करे ये काम..

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श्री योग संजीवनी... बीमार पड़ने के पहले , ये काम केवल आयुर्वेद ही कर सकता है. -------------- --------- ---- 1--केंसर होने का भय लगता हो तो रोज़ाना कढ़ीपत्ते का रस पीते रहें. 2-- हार्टअटेक का भय लगता हो तो रोज़ना अर्जुनासव या अर्जुनारिष्ट पीते रहिए. 3-- बबासीर होने की सम्भावना लगती हो तो पथरचटे के हरे पत्ते रोजाना सबेरे चबा कर खाएँ . 4-- किडनी फेल होने का डर हो तो हरे धनिये का रस प्रात: खाली  पेट पिएँ. 5-- पित्त की शिकायत का भय हो तो रोज़ाना सुबह शाम आंवले का रस पिएँ. 6-- सर्दी - जुकाम की सम्भावना हो तो नियमित कुछ दिन गुनगुने पानी में थोड़ा सा हल्दी चूर्ण डालकर पिएँ. 7-- गंजा होने का भय हो तो बड़ की जटाएँ कुचल कर नारियल के तेल में उबाल कर छान कर,रोज़ाना स्नान के पहले उस तेल की मालिश करें. 8-- दाँत गिरने से बचाने हों तो फ्रिज और कूलर का पानी पीना बंद कर दें . 9-- डायबिटीज से बचाव के लिए तनावमुक्त रहें, व्यायाम करें, रात को जल्दी सो जाएँ, चीनी नहीं खाएँ , गुड़ खाएँ. 10--किसी चिन्ता या डर के कारण नींद नहीं आती हो तो रोज़ाना भोजन के दो घन्टे पूर्व 20 या 25 मि. ली. अश्वग...

शयन के नियम...

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श्री योग संजीवनी...   शयन के नियम...     पूर्व अथवा दक्षिण दिशा की ओर ही सिर करके सोना चाहिए, इससे जीवनशक्ति का विकास होता है तथा दीर्घायु की प्राप्ति होती है।     जबकि उत्तर व पश्चिम दिशा की ओर सिर करके सोने से जीवनशक्ति का ह्रास होता है व रोग उत्पन्न होते हैं।    हाथ-पैरों को सिकोड़कर, पैरों के पंजों की आँटी (क्रास) करके, सिर के पीछे तथा ऊपर हाथ रखकर व पेट के बल नहीं सोना चाहिए।     सूर्यास्त के दो ढाई घंटे बाद सो जाना व सूर्योदय से दो ढाई घंटे पूर्व उठ जाना उत्तम है।      शास्त्राध्ययन करके प्रणव(ॐ) का दीर्घ उच्चारण करते हुए अथवा      श्वासोच्छवास में भगवन्नाम या गुरुमंत्र का जप करते हुए सोने से नींद भी उपासना हो जाती है।*     स्वस्थ रहने के लिए कम-से-कम छः घंटे और अधिक से अधिक साढ़े सात घंटे की नींद करनी चाहिए, इससे कम या ज्यादा नहीं।     जब आप शयन करें तब कमरे की खिड़कियाँ खुली हों और रोशनी न हो।