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फैटी लीवर और आंखों की रोशनी का चुकंदर से इलाज...

श्री योग संजीवनी... चुकंदर बुढ़ापे में भी ये पौधा आँखों की रौशनी लौटा सकता है, फैटी लिवर और आंतो को बिलकुल ठीक कर सकता है!!!       चुकंदर के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ चुकंदर स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक सब्जी है। इसमें कार्बोहाइड्रेट और कम मात्रा में प्रोटीन और वसा पाया जाता है। इसका जूस सब्जियों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। चुकंदर एक सब्जी है जिसको हम कच्चा या सलाद में खा सकते हैं, अर्थात कच्चा और पका कर दोनों ही तरीके से खा सकते हैं। और इसका रस तो बहुत ही स्वादिष्ट होता है, ये सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं बल्कि गुणों का खजाना है, लोग इसको सिर्फ खून बढाने के लिए जानते हैं, मगर वो इसके दुसरे फायदे नहीं जानते होंगे जैसे ये लीवर से फैट हटाने के लिए बहुत ही रामबाण है। आंतो में फैली गंदगी के अवरोध को समाप्त करने के लिए, और आपकी आँखों को फिर से रोशन करने के लिए और ये यहीं नहीं रुकता ये हमारे ब्लड सर्कुलेशन को बढाता है,  हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए ये अमृत के समान है। सामग्री 2 चुकंदर 2 प्याज 1 चम्मच – तिल का का तेल 1 चम्मच – सिरका स्वादानुसार – सेंधा नमक तैयार...

योग क्या है ??योग करने के सही समय और नियम...

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श्री योग संजीवनी...          योग क्या है? ---------------- योग सही तरह से जीने का विज्ञान है और इस लिए इस दैनिक जीवन में शामिल किया जाना चाहिए। यह व्यक्ति के सभी पहलुओं पर काम करता है: भौतिक, मानसिक, भावनात्मक, आत्मिक और आध्यात्मिक। योग का अर्थ 'एकता' या 'बांधना' है। इस शब्द की जड़ है संस्कृत शब्द 'युज', जिसका मतलब है 'जुड़ना'। आध्यात्मिक स्तर पर इस जुड़ने का अर्थ है सार्वभौमिक चेतना के साथ व्यक्तिगत चेतना का एक होना। व्यावहारिक स्तर पर, योग शरीर, मन और भावनाओं को संतुलित करने और तालमेल बनाने का एक साधन है। यह योग या एकता आसन, प्राणायाम, मुद्रा, बँध, षट्कर्म और ध्यान के अभ्यास के माध्यम से प्राप्त होती है। तो योग जीने का एक तरीका भी है और अपने आप में परम उद्देश्य भी। योग सबसे पहले लाभ पहुँचाता है बाहरी शरीर (फिज़िकल बॉडी) को, जो ज्यादातर लोगों के लिए एक व्यावहारिक और परिचित शुरुआती जगह है। जब इस स्तर पर असंतुलन का अनुभव होता है, तो अंग, मांसपेशियों और नसें सद्भाव में काम नहीं करते हैं, बल्कि वे एक-दूसरे के विरोध में कार्य करते हैं। बाहरी शरी...

नाभि पर तेल लगाने के अद्भुत फायदे ....

*नाभी कुदरत की एक अद्भुत देन है* एक 62 वर्ष के बुजुर्ग को अचानक बांई आँख  से कम दिखना शुरू हो गया। खासकर  रात को नजर न के बराबर होने लगी।जाँच करने से यह निष्कर्ष निकला कि उनकी आँखे ठीक है परंतु बांई आँख की रक्त नलीयाँ सूख रही  है। रिपोर्ट में यह सामने आया कि अब वो जीवन भर देख  नहीं पायेंगे।.... मित्रो यह सम्भव नहीं है.. मित्रों हमारा शरीर परमात्मा की अद्भुत देन है...गर्भ की उत्पत्ति नाभी के पीछे होती है और उसको माता के साथ जुडी हुई नाडी से पोषण मिलता है और इसलिए मृत्यु के तीन घंटे तक नाभी गर्म रहती है। गर्भधारण के नौ महीनों अर्थात 270 दिन बाद एक सम्पूर्ण बाल स्वरूप बनता है। नाभी के द्वारा सभी नसों का जुडाव गर्भ के साथ होता है। इसलिए नाभी एक अद्भुत भाग है। नाभी के पीछे की ओर पेचूटी या navel button होता है।जिसमें 72000 से भी अधिक रक्त धमनियां स्थित होती है।अगर सारी धमनियों को जोड़ा जाए तो उनकी लम्बाई इतनी हो जायेगी कि पृथ्वी के गोलाई पर दो बार लपेटा जा सके। नाभी में गाय का शुध्द घी या तेल लगाने से बहुत सारी शारीरिक दुर्बलता का उपाय हो सकता है। 1. आँखों का ...

तरबूज सेवन के नियम

🍉🍉🍉🍉🍉🍉 *तरबूज सेवन के नियम जो कोई नहीं बताता ।*             गलत तरीके से खाया तरबूज आपको हॉस्पिटल पंहुचा सकता है। 1.खाली पेट तरबूज का सेवन न करें, और करना पड़े तो बिना नमक न करें। 2. जुकाम,नजला रोगी इसका सेवन न करें। 3. अस्थमा, हार्ट और शुगर ,किडनी रोगी बहुत कम मात्रा में सेवन करें या न करें। इसमें एमिनो एसिड अस्थमा और पोटेशियम हार्ट वालो को थोड़ी दिक्कत कर सकता, शूगर का लेवल बढ़ाता है। 4. तरबूज के बाद कोई भी लिक्विड न लें। पानी तो किसी हालत में न पियें जान पर बन आएगी| 5. चावल और तरबूज विरुद्ध आहार है, इनके बीच 3 घण्टे का गैप रखें। 6. रात के समय भी तरबूज बिलकुल न खाए 7.धुप में तपा हुआ तरबूज पानी में रखकर गर्मी निकाल दें तब खाए| गरम तरबूज बिलकुल न खाए| 8.तरबूज काटकर तुरंत खाए| कटा तरबूज फ्रिज में भी न रखें| चिल्ड तरबूज खाने का मन हो तो साबुत फ्रिज में रखे| या बर्फीले पानी में साबुत रखें| फिर खाए| 9. मार्केट का कटा खुला बिकने वाला तरबूज किसी हालत में न खाएँ ।

मूंग की दाल और अद्भुत औषधि.......

कमाल की है ‘मूंग की दाल’ और हम इसे बीमारियों में क्यों खाते हैं..? सभी जानते हैं कि दालें प्रोटीन से भरपूर होती हैं, लेकिन दालों में सबसे उत्तम, स्वास्थवर्द्धक तथा शक्तिवर्द्धक दाल मूंग की होती है। ● मूंग की दाल की खास बात है कि यह सुपाच्य होती है। ● इसके अतिरिक्त मूंग की दाल में कार्बोहाइड्रेट, कई प्रकार के विटामिन, फॉस्फोरस और खनिज तत्व पाए जाते हें, जो अनेक बीमारियों से लड़ने की क्षमता रखते हैं। ● मूंग साबूत हो या धुली, पोषक तत्वों से भरपूर होती है। ● अंकुरित होने के बाद तो इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्वों कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन्स की मात्रा दोगुनी हो जाती है। अंकुरित मूंग दाल में मैग्नीशियम, कॉपर, फोलेट, राइबोफ्लेविन, विटामिन-सी, फाइबर, पोटेशियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, आयरन, विटामिन बी-6, नियासिन, थायमिन और प्रोटीन होता है। ● कुछ लोगों को लगता है कि मूंग दाल बीमारी में खाने के लिए होती है, जबकि मूंग दाल में इतने पौष्टिक तत्व होते है कि अपनी खुराक में उसे शामिल करना ही चाहिए। ● मात्र एक कटोरी पकी हुई मूंग की दाल में 100 से भी कम केलौरी होती है। ● इ...

श्रीमद्भागवत गीता के आदर्श वाक्य.....

*गीता के आदर्शों पर चलकर* *मनुष्य न केवल खुद का कल्याण* *कर सकता है, बल्कि* *वह संपूर्ण मानव जाति* *की भलाई कर सकता है*  श्रीमद्भागवत गीता न केवल धर्म का उपदेश देती है, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाती है। महाभारत के युद्ध के पहले अर्जुन और श्रीकृष्ण के संवाद लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं। गीता के उपदेशों पर चलकर न केवल हम स्वयं का, बल्कि समाज का कल्याण भी कर सकते हैं। पौराणिक विपिन शास्त्री बताते हैं कि महाभारत के युद्ध में जब पांडवों और कौरवों की सेना आमने-सामने होती है तो अर्जुन अपने बुंधओं को देखकर विचलित हो जाते हैं। तब उनके सारथी बने श्रीकृष्ण उन्हें उपदेश देते हैं। ऐसे ही वर्तमान जीवन में उत्पन्न कठिनाईयों से लडऩे के लिए मनुष्य को गीता में बताए ज्ञान की तरह आचरण करना चाहिए। इससे वह उन्नति की ओर अग्रसर होगा। 1- क्रोध पर नियंत्रण गीता में लिखा है क्रोध से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है। जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाते हैं। जब तर्क नष्ट होते हैें तो व्यक्ति का पतन शुरू हो जाता है। 2 नजरिया से बदलाव जो ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान और कर्म को...

त्रिफला चूर्ण

🌿🍈🌿🍈🌿🍈🌿🍈🌿🍈 ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ   *त्रिफला चूर्ण* 🌿आँवला, बहेड़ा व हरड़ का चूर्ण समान मात्रा में मिलाकर त्रिफला तैयार कीजिए। यह चूर्ण आवश्यकतानुसार 1 से 8 ग्राम तक खाया जा सकता है। सावधानीः रास्ता चलकर थके हुए, बलहीन, कृश, उपवास से दुर्बल बने हुए को तथा गर्भवती स्त्री एवं नये बुखारवाले को त्रिफला नहीं लेना चाहिए। 🌿औषधि-प्रयोगः 🌼नेत्र-रोगः आँखों के सभी रोगों के लिए त्रिफला एक अकसीर औषध है। इस त्रिफला चूर्ण को घी तथा मिश्री के साथ मिलाकर कुछ माह तक खाने से नेत्ररोग दूर होते हैं। नेत्रों की सूजन, दर्द, लालिमा, जलन, कील, ज्योति मांद्य आदि रोगों में सुबह-शाम नियमित रूप से त्रिफला चूर्ण अथवा त्रिफला घृत लेने से और त्रिफला जल से नेत्र प्रक्षालन करने से नेत्र-सम्बन्धी समस्त विकार मिटते हैं व नेत्रों की ज्योति तथा नेत्रों का तेज बढ़ता है। 🌹त्रिफला जल बनाने की विधिः मिट्टी के कोरे बर्तन या काँच के बर्तन में 2 ग्राम त्रिफला चूर्ण 200 ग्राम जल में भिगोकर रखें। 4-6 घंटे बाद उस जल को ऊपर से निथारकर बारीक स्वच्छ कपड़े से छान लें। फिर उस जल से नेत्रों को नित्य धोयें या उसमें ...