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कब क्या खाएं और नही

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 ⚫-दूध और नमक का संयोग सफ़ेद दाग या किसी भी स्किन डीजीज को जन्म दे सकता है, बाल असमय सफ़ेद होना या बाल झड़ना भी स्किन डीजीज ही है। ⚫-सर्व प्रथम यह जान लीजिये कि कोई भी आयुर्वेदिक दवा खाली पेट खाई जाती है और दवा खाने से आधे घंटे के अंदर कुछ खाना अति आवश्यक होता है, नहीं तो दवा की गरमी आपको बेचैन कर देगी। ⚫-दूध या दूध की बनी किसी भी चीज के साथ दही ,नमक, इमली, खरबूजा,बेल, नारियल, मूली, तोरई,तिल ,तेल, कुल्थी, सत्तू, खटाई, नहीं खानी चाहिए। ⚫-दही के साथ खरबूजा, पनीर, दूध और खीर नहीं खानी चाहिए। ⚫-ठंडे जल के साथ घी, तेल, खरबूज, अमरूद, ककड़ी, खीरा, जामुन ,मूंगफली कभी नहीं। ⚫-शहद के साथ मूली , अंगूर, गरम खाद्य या गर्म जल कभी नहीं। ⚫-खीर के साथ सत्तू, शराब, खटाई, खिचड़ी , कटहल कभी नहीं। ⚫-घी के साथ बराबर मात्र1 में शहद भूल कर भी नहीं खाना चाहिए ये तुरंत जहर का काम करेगा। ⚫-तरबूज के साथ पुदीना या ठंडा पानी कभी नहीं। ⚫-चावल के साथ सिरका कभी नहीं। ⚫-चाय के साथ ककड़ी खीरा भी कभी मत खाएं। ⚫-खरबूज के साथ दूध, दही, लहसून और मूली कभी नहीं। *कुछ चीजों को एक साथ खा...

खान पान में नियम...

👉 *आंवला* किसी भी रूप में थोड़ा सा आंवला हर रोज़ खाते रहे, जीवन भर उच्च रक्तचाप और हार्ट फेल नहीं होगा। 👉 *मेथी* मेथीदाना पीसकर रख ले। एक चम्मच एक गिलास पानी में उबाल कर नित्य पिए। मीठा, नमक कुछ भी नहीं डाले। इस से आंव नहीं बनेगी, शुगर कंट्रोल रहेगी और जोड़ो के दर्द नहीं होंगे और पेट ठीक रहेगा। 👉 *नेत्र स्नान* मुंह में पानी का कुल्ला भर कर नेत्र धोये। ऐसा दिन में तीन बार करे। जब भी पानी के पास जाए मुंह में पानी का कुल्ला भर ले और नेत्रों पर पानी के छींटे मारे, धोये। मुंह का पानी एक मिनट बाद निकाल कर पुन: कुल्ला भर ले। मुंह का पानी गर्म ना हो इसलिए बार बार कुल्ला नया भरते रहे। भोजन करने के बाद गीले हाथ तौलिये से नहीं पोंछे। आपस में दोनों हाथो को रगड़ कर चेहरा व कानो तक मले। इससे आरोग्य शक्ति बढ़ती हैं। नेत्र ज्योति ठीक रहती हैं। 👉 *शौच* ऐसी आदत डाले के नित्य शौच जाते समय दाँतो को आपस में भींच कर रखे। इस से दांत मज़बूत रहेंगे, तथा लकवा नहीं होगा। 👉 *छाछ* तेज और ओज बढ़ने के लिए छाछ का निरंतर सेवन बहुत हितकर हैं। सुबह और दोपहर के भोजन में नित्य...

पुनर्जन्म

*पुनर्जन्म :--* 🌹🙏🏻🙏🏻🙏🏻🌹 (1) प्रश्न :- पुनर्जन्म किसको कहते हैं ? उत्तर :- जब जीवात्मा एकv शरीर का त्याग करके किसी दूसरे शरीर में जाती है तो इस बार बार जन्म लेने की क्रिया को पुनर्जन्म कहते हैं । (2) प्रश्न :- पुनर्जन्म क्यों होता है ? उत्तर :- जब एक जन्म के अच्छे बुरे कर्मों के फल अधुरे रह जाते हैं तो उनको भोगने के लिए दूसरे जन्म आवश्यक हैं । (3) प्रश्न :- अच्छे बुरे कर्मों का फल एक ही जन्म में क्यों नहीं मिल जाता ? एक में ही सब निपट जाये तो कितना अच्छा हो ? उत्तर :- नहीं जब एक जन्म में कर्मों का फल शेष रह जाए तो उसे भोगने के लिए दूसरे जन्म अपेक्षित होते हैं । (4) प्रश्न :- पुनर्जन्म को कैसे समझा जा सकता है ? उत्तर :- पुनर्जन्म को समझने के लिए जीवन और मृत्यु को समझना आवश्यक है । और जीवन मृत्यु को समझने के लिए शरीर को समझना आवश्यक है । (5) प्रश्न :- शरीर के बारे में समझाएँ ? उत्तर :- हमारे शरीर को निर्माण प्रकृति से हुआ है । जिसमें मूल प्रकृति ( सत्व रजस और तमस ) से प्रथम बुद्धि तत्व का निर्माण हुआ है । बुद्धि से अहंकार ( बुद्धि का आभामण्डल ) । अहंकार से पा...

मन्त्रों से करें रोग निवारण

{💮मन्त्रों से करें रोग निवारण💮} 〰〰〰〰〰〰〰〰 🔺कैंसर रोग "ॐ नम: शिवाय शंभवे कर्केशाय नमो नम:।" यह मंत्र किसी भी तरह के कैंसर रोग में लाभदायक होता है। 🔺मस्तिष्क रोग "ॐ उमा देवीभ्यां नम:।" यह मंत्र मस्तिष्क संबंधी विभिन्न रोगों जैसे सिरदर्द, हिस्टीरिया, याददाश्त जाने आदि में लाभदायी माना जाता है। 🔺आंखों के रोग : "ॐ शंखिनीभ्यां नम:।" इस मंत्र से जातक को मोतियाबिंद सहित रतौंधी, नेत्र ज्योति कम होने आदि की परेशानी में लाभ मिलता है। 🔺हृदय रोग "ॐ नम: शिवाय संभवे व्योमेशाय नम:।" हृदय संबंधी रोगों से अधिकांश लोग पीड़ित होते हैं। इसलिए अगर वे इस मंत्र का जप करें, तो उन्हें लाभ मिलता है। 🔺स्नायु रोग "ॐ धं धर्नुधारिभ्यां नम:। " 🔺कान संबंधी रोग "ॐ व्हां द्वार वासिनीभ्यां नम:।" कर्ण विकारों को दूर करने में यह मंत्र आश्चर्यजनक भूमिका निभाता है। 🔺कफ संबंधी रोग "ॐ पद्मावतीभ्यां नम:। " 🔺श्वास रोग "ॐ नम: शिवाय संभवे श्वासेशाय नमो नम:।" 🔺पक्षाघात रोग "ॐ नम: शिवाय शंभवे खगेशाय नमो नम:...

एकादशी में चावल क्यों नही खाने चाहिए-वैज्ञानिक तथ्य*

❌❌❌ *एकादशी में चावल क्यों नही खाने चाहिए-वैज्ञानिक तथ्य* हमारे शास्त्रों में जो भी व्रत-पर्व,अनुष्ठान बताये गये हैं, उनका धार्मिक महत्व तो होता ही है, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी बहुत उपयोगी है। एकादशी व्रत का मन से संबंध शास्त्रों के अनुसार- आत्मा रथी है, शरीर रथ है और बुद्धि उस रथ की सारथी है।  शरीर में कुल 11 इंद्रियां है और मन एकादश यानि ग्यारहवीं इंद्री है *एकादशी को चंद्रमा आकाश में 11वें अक्ष पर होता है। इस समय मन की दशा बहुत चंचल होती है।* इसीलिये एकादशी व्रत करके, मन को वश में करने का प्रयत्न किया जाता है। *चंचल मन को एकाग्र करने के लिये एकादशी व्रत बहुत उपयोगी है।* अगर आप मन से अशांत रहती हैं, या मन किसी अच्छे काम में नहीं लगता तो एकादशी का व्रत रखने से आपका मन बिल्कुल शांत हो जायेगा। शांत मन से आप जो भी काम करेंगे उसमें सफलता अवश्य मिलेगी। 👉-चंद्रमा का संबंध मन से है और जल उसका प्रधान देवता है। 👉-चावल की खेती में सबसे ज्यादा जल की आवश्यकता होती है यानि चावल भी जल प्रधान है। 👉-एकादशी को चावल खाने से, चंद्रमा की किरणें, शरीर के जल तत्व में हलचल मचायेंगी, ल...

तिथि अनुसार आहार-विहार

तिथि अनुसार आहार-विहार... ( शास्त्रवचन ) प्रतिपदा को कूष्माण्ड(कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है। द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है। तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है था शरीर का नाश होता है। अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान त्याज्य है। एकादशी को शिम्बी(सेम), द्वादशी को पूतिका(पोई) अथवा त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) अमावस्या, पूर्णिमा, संक्रान्ति, चतुर्दशी और अष्टमी तिथि, रविवार, श्राद्ध और व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38) रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए। (ब्रह्मवैव...

खुनी बवासीर का एक दिन में इलाज....

नारियल की जटा से करे खुनी बवासीर का एक दिन में इलाज। नारियल की जटा लीजिए। उसे माचिस से जला दीजिए। जलकर भस्म बन जाएगी। इस भस्म को शीशी में भर कर ऱख लीजिए। कप डेढ़ कप छाछ या दही के साथ नारियल की जटा से बनी भस्म तीन ग्राम खाली पेट दिन में तीन बार सिर्फ एक ही दिन लेनी है। ध्यान रहे दही या छाछ ताजी हो खट्टी न हो। कैसी और कितनी ही पुरानी पाइल्स की बीमारी क्यों न हो, एक दिन में ही ठीक हो जाती है। यह नुस्खा किसी भी प्रकार के रक्तस्राव को रोकने में कारगर है। महिलाओं के मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव या श्वेत प्रदर की बीमारी में भी कारगर है। हैजा, वमन या हिचकी रोग में यह भस्म एक घूँट पानी के साथ लेनी चाहिए। ऐसे कितने ही नुस्खे हिन्दुस्तान के मंदिरों और मठों में साधु संन्यासियों द्वारा आजमाए हुए हैं। इन पर शोध किया जाना चाहिए। दवा लेने के एक घंटा पहले और एक घंटा बाद तक कुछ न खाएं तो चलेगा। अगर रोग ज्यादा जीर्ण हो और एक दिन दवा लेने से लाभ न हो तो दो या तीन दिन लेकर देखिए। हम आपके लिए भारत के कोने कोने से आयुर्वेद के अनसुने चमत्कार ले कर आते हैं, आप भी इनको शेयर कर के ज़्यादा से ज़्यादा लोगो...