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मधुमेह (डायबिटीज)

श्री योग संजीवनी... मधुमेह (डायबिटीज) -- Dr. Subhash Shalya ********************************************** डायबिटीज कोई छोटी-मोटी बीमारी नहीं हैI यह आपको फेवरिट फ़ूड खाने से रोकता है और डाइट में बदलाव करने के लिए मजबूर करता हैI आपको बार-बार अपनी उंगली में सुई चुभाकर भी निराश होना पड़ता हैI आप ब्लड शुगर के लिए बहुत सी दवाएं और कई तरह के इंसुलिन खरीदते हैं और इतना खर्च करने के बाद भी तकलीफ और निराशा ही हाथ लगती हैI इसी वजह से ब्लड शुगर कम करना एक नामुमकिन चुनौती सा लगता हैI हाई ब्लड शुगर आपके ब्लड को गाढ़ा करती है और आपका ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता हैI इस वजह से ऑर्गन्स तक पोषक तत्व नहीं पहुँच पाते हैं और आपका एनर्जी लेवल कम होने लगता हैI फिर आपकी नजर कमजोर होती जाती हैI इसके बाद आपके पास 2 ही रास्ते बचते हैं, या तो पैर कटवाओ या फिर अपने सारे अंगों को मरते हुए देखोI शुगर की बीमारी से पीड़ित कुछ मरीजों की टांगें इतनी खराब हो जाती हैं कि उन्हें काटना भी पड़ता हैI इस से भी ज्यादा पीड़ादायक बात तो ये है कि 4 में से 1 मरीज को पता ही नहीं होता कि उसे डायबिटीज़ है और पता तब चलता है ...

जीवनोपयोगी कुंजियाँ

श्री योग संजीवनी... किस मास में क्या त्याग करना चाहिए... हिन्दू धर्म में किसी मास, तिथि, नक्षत्र आदि में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए इस बारे में विस्तार से वर्णन मिलता है। यहां प्रस्तुत है किस मास में किन पदार्थों का त्याग करना चाहिए। ०१. चैत्र मास में गुड़ का त्याग करना चाहिए। ०२. बैखाख मास में नया तेल का त्याग करना चाहिए (खासकर मालिश न करें)। ०३. जेठ मास के दोपहर में पैदल चलने का त्याग करना चाहिए। ०४. आषाढ़ मास में पका बेल का त्याग करना चाहिए (नहीं खाना चाहिए)। ०५. सावन मास में साग (भाजी) का त्याग करना चाहिए। ०६. भादो मास में दही का त्याग करना चाहिए। ०७. आश्विन (क़्वार) मास में करेला का त्याग करना चाहिए। ०८. कार्तिक मास में बैंगन का त्याग करना चाहिए। ०९. माघ मास में मूली और धनिया का त्याग करना चाहिए। १०. फाल्गुन मास में चना का त्याग करना चाहिए।

बीमारियों के मुख्य कारण......

श्री योग संजीवनी... Japanese professor did surprising research. 1. *Acidity* not only caused by diet errors, but more dominated because of *stress*. 2. *Hypertension* not only caused by too much consumption of salty foods, but mainly because of errors in *managing emotions*. 3. *Cholesterol* is not only caused by fatty foods, but the *excessive laziness* is more responsible. 4. *Asthma* not only because of the disruption of oxygen supply to lungs, but often *sad feelings* make lungs unstable. 5. *Diabetes* not only because of too much consumption of glucose, but selfish & *stubborn attitude* disrupts the function of the pancreas. True cause of any disease are : Spiritual   50% Psychic    25% Social        15% Physical   10% If we want to be healthy, fix our mind.

शरीर मे कहीं भी सूजन हो क्या करे..

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श्री योग संजीवनी...   सूजन चलते-फिरते, उठते-बैठते, सोते-जागते अगर आपके शरीर में सूजन आती है तो ये बेहतरीन घरेलु उपाय करे. सूजन शरीर के जिस हिस्से में होती है वो जगह पिलपिला सी हो जाती है और हाथ से दबाने पर एक गड्डा सा बनने लगता है। सूजन के मुख्य लक्षण में रोगी की त्वचा शुष्क हो जाती है । कमजोरी, प्यास अधिक लगना बुखार आदि का होना है। सूजन कोई अपने आप में बीमारी नहीं है। किसी दूसरी बीमारी की वजह से भी शरीर में सूजन हो सकती है। दिल की बीमारी में सूजन जांघों और हाथों पर होती है। लीवर की समस्या में सूजन पेट पर होती है। गुर्दे की बीमारी में सूजन चेहरे पर होती है। इसके अलावा महिलाओं के मासिक धर्म की समस्या में मुंह हाथ और पैरों पर सूजन होती है। *सूजन का घरेलू उपचार :* एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी का चूर्ण और पिसी हुई मिश्री को घोलकर रोज पीने से सूजन कुछ दिनों में खत्म हो जाती है। एक लीटर पानी में एक कप जौं को उबाल लें और फिर इसे ठंडा करके पीते रहने से सूजन घटने लगती है। इस उपाय को भी नियमित रूप से करें। 350 ग्राम सरसों के तेल में 120 ग्राम लाल मिर्च के चूर्ण को मिल...

हर्निया में क्या करे...

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श्री योग संजीवनी... अंत्रवृद्धि (हर्निया-आंत उतारना) क्या हैं। ● हर्निया पेट की दीवार की दुर्बलता से होता हैं। ● आम बोलचाल की भाषा में हर्निया पेट के किसी भी हिस्से में पैदा होने वाले उभार को कहा जाता हैं। ● इसे आंत उतारना भी कहा जाता हैं। ● व्यक्ति जब लेटता हैं तो यह उभार गायब हो जाता हैं। ● विशेषज्ञ बताते हैं के ये रोग ज़्यादातर पुरुषो को होता हैं। *आइये जाने इस का उपचार* हर्निया के दर्जनो प्रकार पाये जाते हैं, लेकिन छोटी आंत के कारण पैदा होने वाले हर्निया इस प्रकार हैं। 1. #उदरगत 2. #इंग्वाइनल 3. #मलद्वारगत 4. #पुराने शल्यक्रिया के घाव वाले स्थान पर (इंसीजनल) 5. #नाभिगत (अमबलाइकल) लक्षण। ●पेट में दर्द होना● ● यह दर्द निरंतर या कभी कभी हो सकता हैं। ● नाभि क्षेत्र का किसी भी प्रकार से फूलना अथवा उसमे उभार महसूस होना। ● पुरुषो के अंडकोष में हवा या पानी भरने जैसा महसूस होना। उल्लेखनीय हैं के ये लक्षण लेटने पर समाप्त हो जाते हैं। कारण। ● समय से पूर्व पैदा होने वाले बच्चे में ये अधिक होते देखा गया हैं। ●अन्य कारण● ● वृद्धावस्था ● मोटापा ...

बीमार पड़ने के पहले रोज करे ये काम..

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श्री योग संजीवनी... बीमार पड़ने के पहले , ये काम केवल आयुर्वेद ही कर सकता है. -------------- --------- ---- 1--केंसर होने का भय लगता हो तो रोज़ाना कढ़ीपत्ते का रस पीते रहें. 2-- हार्टअटेक का भय लगता हो तो रोज़ना अर्जुनासव या अर्जुनारिष्ट पीते रहिए. 3-- बबासीर होने की सम्भावना लगती हो तो पथरचटे के हरे पत्ते रोजाना सबेरे चबा कर खाएँ . 4-- किडनी फेल होने का डर हो तो हरे धनिये का रस प्रात: खाली  पेट पिएँ. 5-- पित्त की शिकायत का भय हो तो रोज़ाना सुबह शाम आंवले का रस पिएँ. 6-- सर्दी - जुकाम की सम्भावना हो तो नियमित कुछ दिन गुनगुने पानी में थोड़ा सा हल्दी चूर्ण डालकर पिएँ. 7-- गंजा होने का भय हो तो बड़ की जटाएँ कुचल कर नारियल के तेल में उबाल कर छान कर,रोज़ाना स्नान के पहले उस तेल की मालिश करें. 8-- दाँत गिरने से बचाने हों तो फ्रिज और कूलर का पानी पीना बंद कर दें . 9-- डायबिटीज से बचाव के लिए तनावमुक्त रहें, व्यायाम करें, रात को जल्दी सो जाएँ, चीनी नहीं खाएँ , गुड़ खाएँ. 10--किसी चिन्ता या डर के कारण नींद नहीं आती हो तो रोज़ाना भोजन के दो घन्टे पूर्व 20 या 25 मि. ली. अश्वग...

शयन के नियम...

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श्री योग संजीवनी...   शयन के नियम...     पूर्व अथवा दक्षिण दिशा की ओर ही सिर करके सोना चाहिए, इससे जीवनशक्ति का विकास होता है तथा दीर्घायु की प्राप्ति होती है।     जबकि उत्तर व पश्चिम दिशा की ओर सिर करके सोने से जीवनशक्ति का ह्रास होता है व रोग उत्पन्न होते हैं।    हाथ-पैरों को सिकोड़कर, पैरों के पंजों की आँटी (क्रास) करके, सिर के पीछे तथा ऊपर हाथ रखकर व पेट के बल नहीं सोना चाहिए।     सूर्यास्त के दो ढाई घंटे बाद सो जाना व सूर्योदय से दो ढाई घंटे पूर्व उठ जाना उत्तम है।      शास्त्राध्ययन करके प्रणव(ॐ) का दीर्घ उच्चारण करते हुए अथवा      श्वासोच्छवास में भगवन्नाम या गुरुमंत्र का जप करते हुए सोने से नींद भी उपासना हो जाती है।*     स्वस्थ रहने के लिए कम-से-कम छः घंटे और अधिक से अधिक साढ़े सात घंटे की नींद करनी चाहिए, इससे कम या ज्यादा नहीं।     जब आप शयन करें तब कमरे की खिड़कियाँ खुली हों और रोशनी न हो।