पानी कब और कैसे पिए

गर्म पानी के शारीरिक लाभ
सामान्य पानी (Normal Water) शरीर की प्यास दूर करता है तो गर्म पानी शरीर से अनेकों रोगों को बाहर निकालने की सामर्थ्य रखता है । गर्म व कुनकुने पानी का सेहत के साथ बहुत पुराना सम्बन्ध है । गर्म पानी के नित्य नियमबद्ध तरीके से सेवन करने से शरीर को रोगानुसार निम्न प्रकार से लाभ मिलते है-
त्वचा के रुखेपन की समस्या को दूर कर चिकनी व चमकदार त्वचा हासिल करने के लिये एक ग्लास गर्म पानी रोजाना पीएं ।
गर्म पानी पीने से शरीर के सभी विषैले तत्व शरीर से बाहर हो जाते हैं । (Hot Water Removes all poison in the stomach)
सुबह खाली पेट और रात्रि भोजन के बाद एक-एक गिलास गर्म पानी पीते कुछ समय लगातार पीने से पाचन सम्बंधी दिक्कतें दूर हो जाती हैं और कब्ज व गैस जैसी समस्याएं परेशान नहीं करती ।
भूख की कमी, भोजन में अरुचि और पेट में भारीपन जैसी समस्या दिखाई दे तो एक गिलास गर्म पानी में एक निंबू का रस, चाय का आधा चम्मच (2ग्राम) काली मिर्च पावडर और स्वादानुसार थोडा सा नमक डालकर पीने से कुछ ही समय में पेट का भारीपन दूर होकर खुलकर भूख लगना प्रारम्भ हो जाती है ।
खाली पेट गर्म पानी पीने से सीने की जलन दूर होने के साथ मूत्र सम्बन्धी सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं ।
वात से उत्पन्न सभी रोगों जैसे जोडों का दर्द, शरीर के किसी भी हिस्से में गैस के कारण उत्पन्न दर्द दूर करनें में गर्म पानी का सेवन अमृत के समान उपयोगी है ।
गर्म पानी के नियमित सेवन से शरीर का तापमान बढता है जिससे पेशाब व पसीने के माध्यम से शरीर के सारे जहरीले तत्व आसानी से शरीर से बाहर निकलते रहते हैं । इसके माध्यम से रक्त संचार (ब्लड सर्क्युलेशन) सुचारु बना रहता है ।
बुखार में प्यास लगने पर रोगी को ठंडा पानी नहीं पीना चाहिये सिर्फ गर्म पानी ही पीना चाहिये । बुखार में गर्म पानी ही शरीर के लिये अधिक उपयोगी होता है । [16/09 11:26 AM] Rekha Singh: हींग के औषधीय उपयोग :

पेट के रोगों में हींग के प्रयोग :

अजीर्ण :

हींग की चने के आकार की  गोली बनाकर घी के साथ निगलने से अजीर्ण और पेट के दर्द में लाभ होता है।

भूख की कमी :

भोजन करने से पहले घी में भुनी हुई चने के बराबर हींग एवं अदरक का एक छोटा टुकड़ा, मक्खन के साथ लें। इस प्रयोग से भूख खुलेगी |

अपच :

हींग + छोटी हरड़ + सेंधानमक + अजवाइन  सभी को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। एक चम्मच की मात्रा प्रातः-दोपहर-सायं, गर्म पानी के साथ लें। इससे पाचन शक्ति प्रबल होती है।

पेट की गैस :

गैस के रोग में हींग, काला नमक और अजवाइन को पीसकर चूर्ण बनाकर सेवन करने से लाभ होता है।

पीलिया:

चने के बराबर हींग को गूलर के सूखे फलों के साथ खाने से पीलिया में लाभ होता है।

हिचकी :

थोड़ी-सी हींग 10 ग्राम गुड़ में मिलाकर खाने से हिचकियां आना बंद हो जाती हैं।
2 ग्राम हींग, 4 पीस बादाम की गिरी दोनों को एक साथ पीसकर पीने से हिचकी बंद हो जाती है।
थोड़ी-सी हींग पानी में घोलकर पीने से हिचकी में लाभ होता है।
डकार आना :

भुनी हुई हींग + काला नमक + अजवायन को समभाग लेकर देशी घी साथ प्रातः-सांय सेवन करने से डकार, गैस अपच में लाभ मिलता है।

एसिडिटी :

2 ग्राम हींग को भूनकर उसमें थोड़ा-सा कालानमक मिलाकर एक गिलास पानी में उबालकर ठण्डा करके पीने से लाभ होता है।

उल्टी :

हींग को पानी में पीसकर पेट पर लेप करने से उल्टी बंद होती है।
1 ग्राम हींग, 5 ग्राम बहेड़ा का छिलका और 4 लौंग को एक साथ पीसकर 1 कप पानी में मिलाकर पीने से उल्टी आना रुक जाती है।
दस्त के आंव का आना :

5 ग्राम हींग + 10 ग्राम कपूर + 10 ग्राम कत्था +  नीम के कोमल पत्ते 3 ग्राम लेकर तुलसी के रस में पीसकर चने जैसी गोली बना लें। यह गोली दिन में 3-4 बार जामुन के पेड़ की छाल के रस में देने से आमातिसार में लाभ होता है। इसी गोली को गुलाब के रस के साथ देने से हैजे में लाभ होता है |

दर्द में हींग के प्रयोग :

पेट दर्�
[16/09 11:28 AM] Rekha Singh: दर्द में हींग के प्रयोग :

पेट दर्द :

हींग को गर्म पानी में मिलाकर लेप बनाकर नाभि के आस-पास गाढ़ा लेप लगाने से पेट दर्द शान्त होता है।
शुद्ध हींग को घी में मिलाकर चाटने से पेट की बीमारी में लाभ मिलता है।
सेंकी हुई हींग और जीरा, सोंठ, सेंधानमक मिलाकर चौथाई चम्मच भर गर्म पानी से सेवन करना फायदेमंद होता है।
पसली का दर्द:

हींग को गर्म पानी में मिलाकर पसलियों पर मालिश करें। इससे दर्द में लाभ मिलता है।

कमर दर्द :

1 ग्राम सेंकी हुई हींग थोड़े से गर्म पानी में मिलाकर धीरे-धीरे पीने से कमर के दर्द में लाभ होता है।

वातशूल :

हीग को 20 ग्राम पानी में उबालें। जब आधा पानी बच जाए तो तब इसको पीने से वातशूल में लाभ होता है।

दांत दर्द :

हींग को पानी में उबालकर इस पानी से कुल्ले करने से दांतों का दर्द दूर हो जाता है।
हींग को चम्मच भर पानी में गर्म करके रूई भिगोकर दर्द वाले दांत के नीचे रखें। इससे दांतों का दर्द ठीक होता है एवं दांतों में लगे हुए कीड़े भी मर जाते हैं
कान दर्द :

हींग को तिल के तेल में पकाकर इसकी कुछ बूंदें कान में डालने से कान का दर्द दूर होता है।

सिर का दर्द :

सर्दी से सिरदर्द हो रहा हो तो हींग के गर्म  लेप को माथे पर मलें। इससे सिर का दर्द में लाभ मिलेगा।
आधासीसी के कारण होने वाले दर्द के लिए पानी में हींग को घोलकर उसकी कुछ बूंदें नाक में डालने से आराम मिलता है।
जोड़ों का दर्द :

जोड़ों के दर्द को दूर करने के लिये  हींग को घी में पीस लें। फिर इससे जोड़ों पर मालिश करें। इससे गठिया का रोग दूर हो जाता है।

कील, कांटा चुभना :

कांटा चुभने पर हींग को घोलकर उस स्थान पर लेप करने से शरीर के अंग के अन्दर घुसा हुआ कांटा या कील बाहर निकल आता है।

पानी कब नहीं पिएँ – Pani Kab Nahi Piye

गर्म चाय या कॉफी आदि के तुरन्त बाद पानी नहीं पीना चाहिए।

खीरा , खरबूजा या ककड़ी खाने के बाद पानी ना पिएँ।

सम्भोग के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए। दूध पीना अच्छा है।

धूप में से आकर तुरंत पानी नहीं पिएँ। शरीर का तापमान कम हो जाए फिर पिएँ।

भुट्टे खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए।

बहुत गर्म खाने के बाद ठंडा पानी और बहुत ठंडा खाने के बाद गर्म पानी न लें।

खाना खाने के तुरंत बाद अधिक पानी ना पिएँ। एक दो घूंट ले सकते है।

पानी  कब पियें – Pani Kab Piye


जब भी प्यास लगे तब पानी ( Pani ) अवश्य पियें , टालें नहीं । प्यास बताती है की शरीर को पानी  की जरुरत है।

भोजन से आधा घंटे पहले और भोजन के एक घंटे बाद ही पानी पीना चाहिए।

भोजन से आधा घंटा पहले दो गिलास पानी पीने से पेट जल्दी भरेगा। खाना कम खाने में आएगा और वजन कम होगा।

भोजन से तुरंत पहले पानी पीने से पाचन शक्ति कमजोर होती है।

भोजन के तुरंत बाद पानी पीने से शरीर फूलता है , मोटापा चढ़ता  है और कब्ज की शिकायत हो जाती है।

यदि हाई ब्लड प्रेशर हो , लू लगी हो , बुखार , कब्ज , पेट में जलन ,पेशाब में जलन या इन्फेक्शन आदि तरह की समस्या हो तो अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिए।

उल्टी दस्त आदि के समय पानी की कमी ना हो इसके लिए पानी थोड़ा -थोड़ा करके लगातार नमक शक्कर के साथ  पीना चाहिए।अधिक पानी पीने से किडनी में स्टोन आदि की समस्या की सम्भावना कम हो जाती है।

नवप्रसूता ( नवजात शिशु की माँ ) को अधिक पानी नहीं पीना चाहिए। तरल की शरीर में कमी ना हो उसके लिए गुनगुना दूध आदि
तरल पदार्थ लेने चाहिए। फ्रिज का ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए। नवप्रसूता के लिए विशेष प्रकार का पानी बनाने की विधि जानने के लिए पढ़ें  नवजात शिशु की देखभाल कैसे करें  । सवा महीना होने के बाद धीरे धीरे ठंडा पानी पीना शुरू कर सकते है।  शिशु को दूध की कमी न हो इतना पानी और तरल पदार्थ जरूर पीने चाहिए ।

वैसे तो शरीर में पानी की कमी का पता प्यास लगने से चल जाता है। लेकिन अधिक उम्र के लोगो में ये प्यास लगने का तंत्र कमजोर हो जाताहै। अतः अधिक उम्र में पानी पीने का पूरा ध्यान रखना चाहिए।

पानी कितना पिएँ – Pani Kitna Piye

पानी ( pani ) हमारे शरीर के वजन का  दो तिहाई भाग होता है। हमारे शरीर से लगभग  2.5  लीटर पानी रोजाना निकलता है।  जिसमे से
1.5 लीटर पानी किडनी से ,  आधा लीटर पानी स्किन से , 300 ml  पानी फेफड़ों से व 200 ml पानी आँतों से निकलता है। । ये मात्रा
गतिविधि ( activity ) ,तापमान , नमी , या दूसरे कारणों से कम या अधिक हो सकता है। इसलिए कम से कम इस मात्रा की पूर्ती हो जाए
इतना पानी पीना बहुत आवश्यक है।

इस हिसाब से 2-3 लीटर पानी रोज पीना चाहिए ।




सादा पानी के अलावा पानी की कुछ मात्रा भोजन से भी प्राप्त होती है।  कुछ मात्रा शरबत , फलों का जूस , दूध  आदि से भी पानी मिलता है।
इसके अलावा चाय , कॉफी , बियर  से भी हालाँकि  कुछ लोग मानते है की इनसे urin ज्यादा आता है। फिर भी ये पानी water के स्रोत तो है
ही ।

एक्सपर्ट्स मानते है की थोड़ी भी पानी की कमी से दिमाग की गतिविधी पर असर हो सकता है। एक्सरसाइज और गर्मी से काफी मात्रा में पानी
शरीर से कम हो जाता है ऐसे में ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। पानी के निकास की पूर्ती अवश्य की जानी चाहिए।

पानी  कैसे पियें – Pani Kaise Piye

पानी ( pani ) धीरे-धीरे घूँट-घूँट करके पीना चाहिए ताकि वह शरीर के तापमान के अनुसार हो जाये। पानी हमेशा गिलास पर होंठ लगाकर
घूँट -घूँट करकर पीना चाहिए। इसके विपरीत लोग गर्दन ऊँची करके ऊपर से पानी डालकर पीते है जो गलत है क्योंकि ऊपर से पानी पीने से
पूरे फ़ूड पाइप में वायु बनती है। और इससे वायु दोष उत्पन्न होता है। इसकी वजह से अपच ( indigestion ) , एसिडिटी ,खट्टी डकार ,
जॉइंट्स में दर्द , घुटनों में दर्द आदि की परेशानी होने लगती है।

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