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योग की कुछ 100 जानकारी जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए

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श्री योग संजीवनी... *⛳सनातन धर्मरक्षक समिति⛳* *योग🧘‍♀की कुछ 100 जानकारी जिसका ज्ञान सबको होना चाहिए* :-IMPORTANT 100 TIPS IT MAY HELP YOU ALL IN BIG WAY 1.योग,भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है।   2. *लकवा* - सोडियम की कमी के कारण होता है । 3. *हाई बी पी में* -  स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे । 4. *लो बी पी* - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें । 5. *कूबड़ निकलना*- फास्फोरस की कमी । 6. *कफ* - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है , फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है । गुड व शहद खाएं । 7. *दमा, अस्थमा* - सल्फर की कमी । 8. *सिजेरियन आपरेशन* - आयरन , कैल्शियम की कमी । 9. *सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें* । 10. *अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें* । 11. *जम्भाई*- शरीर में आक्सीजन की कमी । 12. *जुकाम* - जो प्रातः काल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें । 13. *ताम्बे का पानी* - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें । 14.  *किडनी* - भूल...

शरीर का कायाकल्प

श्री योग संजीवनी... Punernawa इसकी सिर्फ 1 चम्मच बुढ़ापे में 20 साल की जवानी भर दे, क्योंकि ये पूरे शरीर का कायाकल्प करती है  कैन्सर के मरीज़ों के लिए आयुर्वेद जगत की संजीवनी है जिसका नाम पुनर्नवा है। पुर्ननवा संस्कृत के दो शब्द पुनः अर्थात ‘फिर’ और नव अर्थात ‘नया’ से बना है। पुर्ननवा औषधि में भी अपने नाम के अनुरूप ही शरीर को पुनः नया कर देने वाले गुण पाए जाता है। इसलिए इसे रोगों से लड़ने से लेकर कैंसर के इलाज तक में उपयोग किया जाता है। इसकी 1 चम्मच भोजन के साथ अर्थात सब्जी में मिलाकर सेवन करने से बुढापा नही आता अर्थात बूढ़ा व्यक्ति भी जवाँ बना रहता है क्योंकि इससे शरीर के सभी अंग का पुनः नयी कोशिका का निर्माण होता रहता है। "शरीर पुनर्नवं करोति इति पुनर्नवा" जो अपने रक्तवर्धक एवं रसायन गुणों द्वारा सम्पूर्ण शरीर को अभिनव स्वरूप प्रदान करे, वह है ‘पुनर्नवा’। यह हिन्दी में साटी, साँठ, गदहपुरना, विषखपरा, गुजराती में साटोड़ी, मराठी में घेटुली तथा अंग्रेजी में ‘हॉगवीड’ नाम से जानी जाती है। मूँग या चने की दाल मिलाकर इसकी बढ़िया सब्जी बनती है, जो शरीर की सूजन, मूत्ररोगों (विशेषक...

प्राणायाम क्यों जरूरी है ??

श्री योग संजीवनी... #प्राणायाम क्यों जरूरी है ?? शरीर के स्वस्थ बने रहने में हमारे श्वसन तंत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. दूषित और विषाक्त पर्यावरण वैसे ही हमारे स्वास्थ्य को ग्रस रहा है उस पर हमारा गलत आहार-विहार और सही जीवन शैली सम्बन्धी हमारी अज्ञानता इसमें इजाफा कर रहे हैं. Biovatica .Com इस लेख के माध्यम से श्वसन तंत्र को सशक्त और शरीर को स्वस्थ बनाने में आहार और उचित जीवन शैली की भूमिका पर प्रकाश डाल रहे हैं. प्राकृतिक चिकित्सा की मान्यता के अनुसार हमारा शरीर तभी अस्वस्थ होता है जब शरीर में विषाक्त द्रव्य एकत्रित होने लगते हैं. शरीर को शुद्ध रखने वाले अंग जब अपनी क्षमता के अनुरूप कार्य नहीं कर पाते तब यह स्थिति उत्पन्न होती है. हमारा शरीर जीवित रहे और उसके सारे क्रिया-कलाप सुचारु ढंग से चलते रहें इसके लिए हमारे शरीर को निरंतर ऊर्जा व् शक्ति की आवश्यकता रहती है जिसकी आपूर्ति के लिए हमें नियमित रूप से भोजन, पानी व् श्वास (ऑक्सीजन) ग्रहण करते रहना होता है. अब नियमित रूप से शरीर द्वारा ग्रहण किये गए विभिन्न आहार से ऊर्जा प्राप्त करने की प्रक्रिया से उत्पन्न पदार्थों के रूप...

दस्त होने पर घरेलु उपचार

श्री योग संजीवनी... *दस्त होने पर घरेलु उपचार* दस्त(लूज मोशन) पेट से संबंधित रोग है जिसे डायरिया भी कहते हैजो पाचन तंत्र बिगड़ने के कारण हो सकती है। बड़े और बच्चे, दस्त और पेट में मरोड़ की समस्या से कोई भी प्रभावित हो सकता है। बदहज़मी और खाने पीने की गलत आदतें दस्त के प्रमुख कारण है। इसके इलावा जादा गर्मी और सर्दी लगने से भी पतले दस्त हो सकते है। *पहला प्रयोग* 1 से 2 ग्राम सोंठका पाउडर 2 से 10 ग्राम शहद के साथ देने से दस्त एवं उलटी में लाभ होता है। *दूसरा प्रयोग* तुलसी के पंचांग(जड़, पत्ती, डाली, मंजरी, बीज) काकाढ़ा देने से अथवा प्याज, अदरकएवं पुदीने प्रत्येक के 2 से 5 मिलिलीटर रस में 1 से 2 ग्राम नमक मिलाकर देने से दस्त में लाभ होता है। *तीसरा प्रयोग* दस्त के रोगी की नाभि में बड़ का दूध अदरक का रस भर देने से लाभ होता है। *चौथा प्रयोगः* आम की गुठली की गिरी का 4 से 5 ग्राम चूर्ण शहद के साथ देने से लाभ होता है। *पाँचवाँ प्रयोगः* सौंफ और जीरा सम भाग लेकर तवे पर भूनें और बारीक पीसकर 3-3 ग्राम दिन में 2-3 बार पानी के साथ खिलावें। दस्त बन्द करने के लिए यह सस्ताव अच्छा...

श्वेतप्रदर

श्री योग संजीवनी... *श्वेतप्रदर(सफेद पानी का आना)* परिचय इस रोग में स्त्रियों के योनि के रास्ते सफेद पीला या दूध की तरह सफेद पदार्थ निकलता है। प्रदर रोग में शारीरिक निर्बलता तेजी से बढ़ती है। प्रदर रोग प्रमेह या सुजाक से बिल्कुल अलग होता है। यह रोग खाना-खाने में लापरवाही होने से, अधिक लेसदार, चिपचिपा और बदबूयुक्त सफेद प्रदर का स्राव होने लगता है। श्वेत प्रदर होने पर रोगी के दिमाग में शूल, शरीर के अन्य अंगो में दर्द, योनि में जलन और खुजली होती है। इससे स्त्रियों के कमर में ज्यादा दर्द होता है। प्रदर रोग के कारण अधिक बदबूयुक्त स्राव होता है। सहवास के दौरान भी स्त्रियों को परेशानी होती है। लक्षण इस रोग में स्त्री के योनि से रूखा झागदार और थोड़ा रक्त स्रावित होता है। पित्तज प्रदर में पीला, नीला और लाल रंग का गर्म खून बहता है। कफज प्रदर में सफेद रंग का हल्का लालिमा लिए लिबलिबा स्राव निकलता है और त्रिदोषज प्रदर में शहद जैसा गर्म और बदबूदार साव निकलता है। इस रोग में कमजोरी, थकान, तन्द्रा, मूर्च्छा, जलन, आंखे झपकना, शरीर का पीलापन, प्रलाप करना आदि अनेक लक्षण उत्पन्न होते हैं। कार...

मधुमेह (डायबिटीज)

श्री योग संजीवनी... मधुमेह (डायबिटीज) -- Dr. Subhash Shalya ********************************************** डायबिटीज कोई छोटी-मोटी बीमारी नहीं हैI यह आपको फेवरिट फ़ूड खाने से रोकता है और डाइट में बदलाव करने के लिए मजबूर करता हैI आपको बार-बार अपनी उंगली में सुई चुभाकर भी निराश होना पड़ता हैI आप ब्लड शुगर के लिए बहुत सी दवाएं और कई तरह के इंसुलिन खरीदते हैं और इतना खर्च करने के बाद भी तकलीफ और निराशा ही हाथ लगती हैI इसी वजह से ब्लड शुगर कम करना एक नामुमकिन चुनौती सा लगता हैI हाई ब्लड शुगर आपके ब्लड को गाढ़ा करती है और आपका ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता हैI इस वजह से ऑर्गन्स तक पोषक तत्व नहीं पहुँच पाते हैं और आपका एनर्जी लेवल कम होने लगता हैI फिर आपकी नजर कमजोर होती जाती हैI इसके बाद आपके पास 2 ही रास्ते बचते हैं, या तो पैर कटवाओ या फिर अपने सारे अंगों को मरते हुए देखोI शुगर की बीमारी से पीड़ित कुछ मरीजों की टांगें इतनी खराब हो जाती हैं कि उन्हें काटना भी पड़ता हैI इस से भी ज्यादा पीड़ादायक बात तो ये है कि 4 में से 1 मरीज को पता ही नहीं होता कि उसे डायबिटीज़ है और पता तब चलता है ...

जीवनोपयोगी कुंजियाँ

श्री योग संजीवनी... किस मास में क्या त्याग करना चाहिए... हिन्दू धर्म में किसी मास, तिथि, नक्षत्र आदि में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए इस बारे में विस्तार से वर्णन मिलता है। यहां प्रस्तुत है किस मास में किन पदार्थों का त्याग करना चाहिए। ०१. चैत्र मास में गुड़ का त्याग करना चाहिए। ०२. बैखाख मास में नया तेल का त्याग करना चाहिए (खासकर मालिश न करें)। ०३. जेठ मास के दोपहर में पैदल चलने का त्याग करना चाहिए। ०४. आषाढ़ मास में पका बेल का त्याग करना चाहिए (नहीं खाना चाहिए)। ०५. सावन मास में साग (भाजी) का त्याग करना चाहिए। ०६. भादो मास में दही का त्याग करना चाहिए। ०७. आश्विन (क़्वार) मास में करेला का त्याग करना चाहिए। ०८. कार्तिक मास में बैंगन का त्याग करना चाहिए। ०९. माघ मास में मूली और धनिया का त्याग करना चाहिए। १०. फाल्गुन मास में चना का त्याग करना चाहिए।