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भोजन विधि

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श्री योग संजीवनी... 🌹भोजन विधि 🌹- 🌹अधिकांश लोग भोजन की सही विधि नहीं जानते। गलत विधि से गलत मात्रा में अर्थात् आवश्यकता से अधिक या बहुत कम भोजन करने से या अहितकर भोजन करने से जठराग्नि मंद पड़ जाती है, जिससे कब्ज रहने लगता है। तब आँतों में रूका हुआ मल सड़कर दूषित रस बनाने लगता है। यह दूषित रस ही सारे शरीर में फैलकर विविध प्रकार के रोग उत्पन्न करता है। उपनिषदों में भी कहा गया हैः आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः। शुद्ध आहार से मन शुद्ध रहता है। साधारणतः सभी व्यक्तियों के लिए आहार के कुछ नियमों को जानना अत्यंत आवश्यक है। जैसे- 🌹आलस तथा बेचैनी न रहें, मल, मूत्र तथा वायु का निकास य़ोग्य ढंग से होता रहे, शरीर में उत्साह उत्पन्न हो एवं हलकापन महसूस हो, भोजन के प्रति रूचि हो तब समझना चाहिए की भोजन पच गया है। बिना भूख के खाना रोगों को आमंत्रित करता है। कोई कितना भी आग्रह करे या आतिथ्यवश खिलाना चाहे पर आप सावधान रहें। 🌹सही भूख को पहचानने वाले मानव बहुत कम हैं। इससे भूख न लगी हो फिर भी भोजन करने से रोगों की संख्या बढ़ती जाती है। एक बार किया हुआ भोजन जब तक पूरी तरह पच न जाय एवं खुलकर भूख न...

खिचड़ी कब और क्यों खाये.

श्री योग संजीवनी... *खिचड़ी सिर्फ मरीजों का खाना नहीं, फायदे जानकर हैरान रह जाएंगे* 1 दाल, चावल, सब्ज‍ियों और मसालों से तैयार की गई खिचड़ी काफी स्वादिष्ट और पोषण से भरपूर होती है, जो शरीर को ऊर्जा और पोषण देती है। इसके माध्यम से एक साथ सभी पोषक तत्व प्राप्त किए जा सकते हैं। 2 पाचन क्षमता कमजोर होने पर भी यह आहार आसानी से पच जाता है और पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है, इसलिए बीमारी में मरीजों को इसे खिलाया जाता है, क्यों उस वक्त पाचन शक्ति कमजोर होती है। 3 महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान अक्सर कब्ज या अपच की स्थिति बनती है, ऐसे में खिचड़ी खाना फायदेमंद होता है और आरामदायक भी। इसे खाने के बाद पेट में अतिरिक्त भारीपन नहीं लगता और जल्दी पाचन भी हो जाता है। 4 जब खाना बनाने का समय और मूड न हो, ऐसे में खिचड़ी एक आसान तरीका है, जो जल्दी बन जाती है और स्वादिष्ट भी होती है। इसमें आप विभिन्न दाल, मूंगफली और अन्य सामग्री के साथ बनाकर नयापन भी ला सकते हैं। 5 घी, दही, नींबू या अचार के साथ अलग-अलग फायदे भी देती है, जैसे घी डालकर खाने से शक्ति भी मिलती है और प्राकृतिक चिकनाई भी, दही के साथ यह क...

किस माह में क्या न खाएँ

श्री योग संजीवनी... *पुराने समय की कहावत है - - -* चैते गुड़, वैसाखे तेल । जेठ के पंथ¹, अषाढ़े बेल ।। सावन साग, भादौ दही²। कुवांर करेला, कार्तिक मही³ ।। अगहन जीरा, पूसै धना। माघे मिश्री, फागुन चना।। जो कोई इतने परिहरै, ता घर बैद पैर नहीं धरै।।।। *किस माह में क्या न खाएँ* _*आवश्यक निर्देश* चैत्र माह में नया गुड़ न खाएं  (15 march-15april) बैसाख माह में नया तेल न लगाएं (16April-15may) जेठ माह में दोपहर में नहीं चलना चाहिए (16May-15june) अषाढ़ माह में पका बेल न खाएं  (16june-15july) सावन माह में साग न खाएं  (16july-15August) भादों माह में दही न खाएं  (16august-15september) क्वार माह में करेला न खाएं  (16september-15october) कार्तिक माह में जमीन पर न सोएं (16October-15november) अगहन माह में जीरा न खाएं  (16 November -15 December) पूस माह में धनिया न खाएं  (16 Dec- 15 jan) माघ माह में मिश्री न खाएं  (16jan-15feb) फागुन माह में चना न खाएं (16 feb- 14march ) *आयुर्वेदामृतम्*

आंखों में सूखापन के कारण लक्षण और घरेलू उपाय

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श्री योग संजीवनी... *🌹आंखों में सूखापन के कारण लक्षण और घरेलू उपाय* 🌹आंख में सूखापन तब होता है जब आपकी आंसू ग्रंथियां (tear glands) पर्याप्त मात्रा में आंसू का उत्पादन नहीं करती है या आंसू जल्दी वाष्पित हो जाते हैं। *🌹आंखों की सूखापन के कारण* 👉🏻लंबे समय तक हवा या शुष्‍क हवा के संपर्क में रहना 👉🏻निष्क्रिय आंसू ग्रंथियां 👉🏻बढ़ती उम्र आंखों में कुछ है ऐसा लग रहा है 👉🏻लंबे समय तक आंख का न झपकना 👉🏻कांटेक्ट लैंस (contact lens) का उपयोग लंबे समय तक करना 👉🏻कम्‍प्‍यूटर स्‍क्रीन के सामने ज्‍यादा समय बिताना 👉🏻विटामिन A और विटामिन D की कमी होना *🌹आंखों में सूखापन के लक्षण* 👉🏻आपकी आंखों में चुभन और जलन का एहसास होना 👉🏻आपकी आंखों में दर्द हो रहा हो 👉🏻आंखे लाल और उनमें जलन (red and irritated) हो रही हों 👉🏻आंखों की धुंधली द्रष्टि (Blurry vision) 👉🏻आपकी आंख में या उसके आस-पास बलगम (mucus) आना 👉🏻तेज लाइट बरदास्‍त न कर पाना 👉🏻आंखे थकी थकी लगना 👉🏻आपकी दोनों आंखों में खरोंच आना *🌹आंखों के सूखापन को दूर करने के घरेलू उपाय* 🌹आंखों में ...

वेग रोकने से होने वाले रोग

श्री योग संजीवनी... *🌹वेग रोकने से होने वाले रोग🌹*  *🌹भूख रोकने से होने वाले रोगः* 🌻🍀 *अंगभंगारूचिग्लानिकार्श्यशूलभ्रमाः क्षुधः* भूख रोकने से, भूख लगने पर भी न खाने से शरीर टूटता है, अरुचि, ग्लानि और दुर्बलता आती है। इसके अलावा पेट में शूल-दर्द होता है और सिर में चक्कर आते हैं। पेट में जब दर्द हो तब यह जानने की कोशिश करनी चाहिए कि यह दर्द अजीर्ण के कारण तो नहीं है? यह दर्द अजीर्ण के कारण हो और उसे भूख के कारण होने वाला दर्द मानकर अधिक भोजन करने पर परिस्थिति बिगड़ जाती है।  *🌹प्यास रोकने से होने वाले रोगः* 🌻🍀 *शोषांगसादबाधिर्यसम्मोहभ्रमह्रदगदाः* ।  *तृष्णाया निग्रहात्तत्र* ..... प्यास रोकने से मुखशोष (मुँह का सूखना), शरीर में शिथिलता, अंगों में कार्य करने की अशक्ति महसूस होना बहरापन, मोह, भ्रम, चक्कर आना, आँखों में अन्धापन आना आदि रोग हो सकते हैं। शरीर में धातुओं की कमी होने से हृदय में भी विकृति हो सकती है।  *🌹खाँसी रोकने से होने वाले रोगः*  *🌻🍀कासस्य रोधात्तद् वृद्धिः श्वासारूचिहृदामयाः* ।  *शोषो हिध्मा च.* .... खाँसी को रोक...

बेल के औषधीय गुण

श्री योग संजीवनी... 🍈🍐🍈🍐🍈🍐🍈 *बेल के औषधीय  गुण* बेल एक फल है। जिसमे भरपूर मात्रा में केल्शियम, फास्फोरस, विटामिन, फाइबर, प्रोटीन और आयरन जैसे पोषक तत्त्व होते है। बेल में कई औषधिय गुण है जो की कब्ज, अपच, बवासीर, मधुमेह, कैंसर, साँस की समस्या, पेचिश, दस्त, सुजन आदि रोगों से आराम दिलाता है। बेल गर्मी के मौसम में मिलने वाला ये फल गर्मी से तो राहत दिलाता ही है साथ ही स्वास्थ्य की कई समस्यों से निजात दिलाता है। दिन में एक बार बेल का शर्बत पीते है तो आप हमेशा रोग मुक्त रहेंगे। बेल ऊपर से कठोर और अंदर से पीले रंग का गूदा होता है। गूदा लसादर और चिकना होता है। इससे नारयल की तरह फोड़ना पड़ता है। आइये जानते है इसके स्वास्थ्य लाभ के बारे में। *मधुमेह* 15 पत्ते बेलपत्र और 5 कालीमिर्च पीसकर चटनी बनाकर, एक कप पानी में घोलकर पीने से मधुमेह ठीक हो जाता हैं। यह लम्बे समय एक दो साल लेने से स्थायी रूप से मधुमेह ठीक हो जाता हैं। नित्य प्रात: बेलपत्र का रस 30 ग्राम पीने से भी लाभ होता हैं। *बगल दुर्गन्ध दूर करने हेतु* बिल्व की पत्तियों का रस कुछ दिनों तक बगल में लगाने से दुर्गन्ध द...

ग्रीष्म विशेष

श्री योग संजीवनी... *🌻ग्रीष्म विशेष🌻* *🌹गर्मीनाशक शरबतः🌹* 🌻🍀जीरा, सौंफ, धनिया, काली द्राक्ष अथवा किशमिश व मिश्री समभाग लेके कूटकर मिला रखें। एक चम्मच मिश्रण एक ग्लास ठंडे पानी में भिगो दें। 2 घंटे बाद हाथ से मसलकर, छानकर पीयें। पीते ही शीतलता, स्फूर्ति व ताजगी आयेगी।    *🌹गर्मी एवं पित्तजन्य तकलीफों में🌹*  🌻🍀रात को दूध में एक चम्मच त्रिफला घृत (त्रिफला घृत आयुर्वेदिक विश्वसनीय जगह से लेना चाहिए) मिलाकर पीयें। पित्तजन्य दाह, सिरदर्द, आँखों की जलन में आराम मिलेगा।     🌻🍀दोपहर को चार बजे एक चम्मच गुलकंद धीरे धीरे चूसकर खाने से भी लाभ होता है।    *🌹लू से बचने हेतुः🌹* 🌻🍀गुड़ (पुराना गुड़ मिले तो उत्तम) पानी में भिगोकर रखें। एक दो घंटे बाद छान कर पीयें। इससे लू से रक्षा होती है।     🌻🍀प्याज और पुदीना मिलाकर बनायी हुई चटनी भी लू से रक्षा करती है।      *🌹ग्रीष्म में शक्तिवर्धक🌹*  🌻🍀ठंडे पानी में जौ अथवा चने का सत्तू, मिश्री व घी मिलाकर पीयें। सम्पूर्ण ग्रीष्म में शक्ति बनी रहेगी।