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आज का सुविचार

श्री योग संजीवनी.. आज का सुविचार.....

स्वामी विवेकानंद जी

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श्री योग संजीवनी... 🔰आज का प्रेरक प्रसंग ✅       !! मुसीबत से डरकर भागो मत !!        !! उसका डटकर सामना करो !! --------------------------------------------- स्वामी विवेकानंद : 12 जनवरी जन्म दिवस विशेष _____________________ स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी सन्‌ 1863 को कलकत्ता में हुआ था। इनका बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ था। इनके पिता श्री विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट के एक प्रसिद्ध वकील थे। 25 वर्ष की अवस्था में नरेन्द्र ने गेरुआ वस्त्र धारण कर लिये। तत्पश्चात् उन्होंने पैदल ही पूरे भारतवर्ष की यात्रा की। सन्‌ 1893 में शिकागो (अमेरिका) में विश्व धर्म परिषद् हो रही थी। स्वामी विवेकानन्द उसमें भारत के प्रतिनिधि के रूप में पहुँचे। 4 जुलाई, 1902 को बेलूर में रामकृष्ण मठ में उन्होंने ध्यानमग्न अवस्था में महासमाधि धारण कर प्राण त्याग दिए। उनके शिष्यों और अनुयायियों ने उनकी स्मृति में वहाँ एक मंदिर बनवाया और समूचे विश्व में विवेकानंद तथा उनके गुरु रामकृष्ण के संदेशों के प्रचार के लिए 130 से अधिक केंद्रों की स्थापना की। इनके जन्म दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्री...

वजन कम करने के लिए अपनाएं योग और घरेलू नुस्खे

श्री योग संजीवनी... नींबू और त्रिफला चूर्ण का सेवन करे। एक पैन में पानी के साथ त्रिफला चूर्ण डालकर धीमी आंच में गर्म करें। जब पानी आधा बचे तो इस काढ़ा का सेवन करें। रोजाना खाली पेट गौधन अर्क का करे सेवन लौकी का जूस पिएं। इसमें आप नींबू और पुदीना भी डालकर सकते हैं। इससे जूस का स्वाद बदल जाएगा। गर्म पानी में 1 चम्मच शहद, आधा चम्मच नींबू, आधा चम्मच अदरक का रस, आधा चम्मच हल्दी का रस डालकर अच्छी तरह मिक्स करके इसका सेवन खाली पेट करें।  अंकुरित अनाज खाएं। अनाज का सेवन करे बंद। मोटापा कम करने के लिए करें ये प्राणायाम भस्त्रिका  इस प्राणायाम को करने से पूरे शरीर में ऑक्सीजन का ठीक ढंग से प्रवाह होता है। जिससे आपको डायबिटीज के साथ-साथ कई अन्य बीमारियों से भी निजात मिल जाएगा।  अनुलोम-विलोम सबसे पहले पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं। अब दाएं हाथ की अनामिका और सबसे छोटी उंगली को मिलाकर बाएं नाक पर रखें और अंगूठे को दाएं वाले नाक पर लगा लें। तर्जनी और मध्यमा को मिलाकर मोड़ लें। अब बाएं नाक की ओर से सांस भरें और उसे अनामिका और सबसे छोटी उंगली को मिलाकर बंद कर लें। इसके बाद दाएं नाक ...

कमर दर्द के घरेलू उपाय

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श्री योग संजीवनी... 🌹1. रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन-चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियां काली न हो जायें) गर्म कर लें। ठंडा होने पर इस तेल से कमर की मालिश करें। 🌹2. नमक मिले गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। इसके बाद पेट के बल लेट जाएं। दर्द के स्थान पर तौलिये से भाप लें। कमर दर्द से राहत पहुंचाने का यह एक अचूक उपाय है। 🌹3. कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। इस नमक को थोड़े मोटे सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। कमर पर इस पोटली से सेक करने से भी दर्द से आराम मिलता है। 🌹4. अजवाइन को तवे के पर थोड़ी धीमी आंच पर सेंक लें। ठंडा होने पर धीरे-धीरे चबाते हुए निगल जाएं। इसके नियमित सेवन से कमर दर्द में लाभ मिलता है। 🌹5. अधिक देर तक एक ही पोजीशन में बैठकर काम न करें। हर चालीस मिनट में अपनी कुर्सी से उठकर थोड़ी देर टहल लें। 🌹6. नर्म गद्देदार सीटों से परहेज करना चाहिए। कमर दर्द के रोगियों को थोड़ा सख्ते बिस्तर बिछाकर सोना चाहिए। 🌹7. योग भी कमर दर्द में लाभ पहुंचाता है। भुन्ज्गासन, शलभासन, हलासन, उत्तानपाद...

शास्त्र

श्री योग संजीवनी... *जिस प्रकार एक माँ का हाथ में डंडा लेने का उद्देश्य अपनी संतान को पीटना नहीं अपितु उसे थोडा सा भय दिखाकर गलत काम करने से रोकना होता है। ठीक इसी प्रकार हमारे शास्त्रों में भी दंड विधान का मतलव किसी को आतंकित करना अथवा भयभीत करना नहीं, थोडा सा भय दिखाकर मनुष्यों को कुमार्ग पर चलने से बचा लेना है।*          *शास्त्रों का काम डराना नहीं है , जीवन को अराजकता से बचाना है। शास्त्र पशु बने मनुष्यों के लिए उस चाबुक के समान है जो सही दिशा में जाने को बार- बार प्रेरित करता है। शास्त्रों का उद्देश्य भयभीत करना नहीं अपितु भयमुक्त कर देना है।*          *शास्त्र घर में सजाकर रखने के लिए नहीं होते, जीवन में उतारकर कर्मों को सुन्दर बनाने के लिए होते हैं। अतः शास्त्रों से डरो नहीं बल्कि उनके बताये मार्ग पर चलो। ताकि आपको समझाने के लिए कोई विरोध रुपी शस्त्र का सहारा ना ले।*

क्या आप जानते है व्रत कितने प्रकार के होते हैं।

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श्री योग संजीवनी... व्रत या उपवास कितने प्रकार के होते हैं.??? 〰️〰️🔸〰️〰️🔸🔸〰️〰️🔸〰️〰️ व्रत रखना एक पवित्र कर्म है और यदि इसे नियम पूर्वक नहीं किया जाता है तो न तो इसका कोई महत्व है और न ही लाभ बल्कि इससे नुकसान भी हो सकते हैं। आप व्रत बिल्कुल भी नहीं रखते हैं तो भी आपको इस कर्म का भुगतान करना ही होगा। राजा भोज के राजमार्तण्ड में 24 व्रतों का उल्लेख है। हेमादि में 700 व्रतों के नाम बताए गए हैं। गोपीनाथ कविराज ने 1622 व्रतों का उल्लेख अपने व्रतकोश में किया है। व्रतों के प्रकार तो मूलत: तीन है:- 1. नित्य, 2. नैमित्तिक और 3. काम्य। 1.नित्य व्रत👉 उसे कहते हैं जिसमें ईश्वर भक्ति या आचरणों पर बल दिया जाता है, जैसे सत्य बोलना, पवित्र रहना, इंद्रियों का निग्रह करना, क्रोध न करना, अश्लील भाषण न करना और परनिंदा न करना, प्रतिदिन ईश्वर भक्ति का संकल्प लेना आदि नित्य व्रत हैं। इनका पालन नहीं करते से मानव दोषी माना जाता है। 2.नैमिक्तिक व्रत👉 उसे कहते हैं जिसमें किसी प्रकार के पाप हो जाने या दुखों से छुटकारा पाने का विधान होता है। अन्य किसी प्रकार के निमित्त के उपस्थित होने पर चांद्रा...

दिमागी शक्ति के लिए क्या करे

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श्री योग संजीवनी...  विद्यार्थियों के उत्तम स्वास्थ्य तथा बुद्धि, एकाग्रता व स्मरणशक्ति बढ़ाने हेतु. 1.अकेले में मानसिक कल्पनाओं से पागलपन का अंश आ गया अथवा आलस्य है, चिड़चिड़ा स्वभाव है – यह सब दिमाग की कमजोरी है | ऐसे लोगों को क्या करना चाहिए ? हाथों के अँगूठे के पासवाली पहली ऊँगली का अग्रभाग अँगूठे के अग्रभाग के नीचे स्पर्श कराओ और शेष तीन उंगलियाँ सीधी रखों | ऐसे ज्ञान मुद्रा करो और शवासन में सीधे लेट जाओ | दाँतों से जीभ को थोडा-सा बाहर निकालकर रखें | तो बड़े-बड़े इंजेक्शनो से और दिमाग के स्पेशलिस्टों से उतना लाभ नहीं होगा जितना इस प्रकार ज्ञान मुद्रा करने से ही हो जायेगा | थोड़े पागलपन की शुरुआत हो तो वह नियंत्रित हो जायेगा | चिड़चिड़ापन, आलस्य, क्रोध, स्मरणशक्ति की कमजोरी व चंचलता नियंत्रित हो जायेगी और एकाग्रता बढ़ेगी, स्नायुओं में शक्ति बढ़ेगी | इसके साथ मामरा बादाम खा लें तो कहना क्या ! 2. ॐकार का उच्चारण करें , भ्रूमध्य में ॐकार को, सद्गुरु को देखें | इससे बुद्धि विलक्षण ढंग से बढ़ती है | 3 . १५-२० मि.ली. आँवला रस १ कप गुनगुने पानी में मिलाकर भोजन के मध्य मे...

भोजन विधि

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श्री योग संजीवनी... 🌹भोजन विधि 🌹- 🌹अधिकांश लोग भोजन की सही विधि नहीं जानते। गलत विधि से गलत मात्रा में अर्थात् आवश्यकता से अधिक या बहुत कम भोजन करने से या अहितकर भोजन करने से जठराग्नि मंद पड़ जाती है, जिससे कब्ज रहने लगता है। तब आँतों में रूका हुआ मल सड़कर दूषित रस बनाने लगता है। यह दूषित रस ही सारे शरीर में फैलकर विविध प्रकार के रोग उत्पन्न करता है। उपनिषदों में भी कहा गया हैः आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः। शुद्ध आहार से मन शुद्ध रहता है। साधारणतः सभी व्यक्तियों के लिए आहार के कुछ नियमों को जानना अत्यंत आवश्यक है। जैसे- 🌹आलस तथा बेचैनी न रहें, मल, मूत्र तथा वायु का निकास य़ोग्य ढंग से होता रहे, शरीर में उत्साह उत्पन्न हो एवं हलकापन महसूस हो, भोजन के प्रति रूचि हो तब समझना चाहिए की भोजन पच गया है। बिना भूख के खाना रोगों को आमंत्रित करता है। कोई कितना भी आग्रह करे या आतिथ्यवश खिलाना चाहे पर आप सावधान रहें। 🌹सही भूख को पहचानने वाले मानव बहुत कम हैं। इससे भूख न लगी हो फिर भी भोजन करने से रोगों की संख्या बढ़ती जाती है। एक बार किया हुआ भोजन जब तक पूरी तरह पच न जाय एवं खुलकर भूख न...

खिचड़ी कब और क्यों खाये.

श्री योग संजीवनी... *खिचड़ी सिर्फ मरीजों का खाना नहीं, फायदे जानकर हैरान रह जाएंगे* 1 दाल, चावल, सब्ज‍ियों और मसालों से तैयार की गई खिचड़ी काफी स्वादिष्ट और पोषण से भरपूर होती है, जो शरीर को ऊर्जा और पोषण देती है। इसके माध्यम से एक साथ सभी पोषक तत्व प्राप्त किए जा सकते हैं। 2 पाचन क्षमता कमजोर होने पर भी यह आहार आसानी से पच जाता है और पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है, इसलिए बीमारी में मरीजों को इसे खिलाया जाता है, क्यों उस वक्त पाचन शक्ति कमजोर होती है। 3 महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान अक्सर कब्ज या अपच की स्थिति बनती है, ऐसे में खिचड़ी खाना फायदेमंद होता है और आरामदायक भी। इसे खाने के बाद पेट में अतिरिक्त भारीपन नहीं लगता और जल्दी पाचन भी हो जाता है। 4 जब खाना बनाने का समय और मूड न हो, ऐसे में खिचड़ी एक आसान तरीका है, जो जल्दी बन जाती है और स्वादिष्ट भी होती है। इसमें आप विभिन्न दाल, मूंगफली और अन्य सामग्री के साथ बनाकर नयापन भी ला सकते हैं। 5 घी, दही, नींबू या अचार के साथ अलग-अलग फायदे भी देती है, जैसे घी डालकर खाने से शक्ति भी मिलती है और प्राकृतिक चिकनाई भी, दही के साथ यह क...

किस माह में क्या न खाएँ

श्री योग संजीवनी... *पुराने समय की कहावत है - - -* चैते गुड़, वैसाखे तेल । जेठ के पंथ¹, अषाढ़े बेल ।। सावन साग, भादौ दही²। कुवांर करेला, कार्तिक मही³ ।। अगहन जीरा, पूसै धना। माघे मिश्री, फागुन चना।। जो कोई इतने परिहरै, ता घर बैद पैर नहीं धरै।।।। *किस माह में क्या न खाएँ* _*आवश्यक निर्देश* चैत्र माह में नया गुड़ न खाएं  (15 march-15april) बैसाख माह में नया तेल न लगाएं (16April-15may) जेठ माह में दोपहर में नहीं चलना चाहिए (16May-15june) अषाढ़ माह में पका बेल न खाएं  (16june-15july) सावन माह में साग न खाएं  (16july-15August) भादों माह में दही न खाएं  (16august-15september) क्वार माह में करेला न खाएं  (16september-15october) कार्तिक माह में जमीन पर न सोएं (16October-15november) अगहन माह में जीरा न खाएं  (16 November -15 December) पूस माह में धनिया न खाएं  (16 Dec- 15 jan) माघ माह में मिश्री न खाएं  (16jan-15feb) फागुन माह में चना न खाएं (16 feb- 14march ) *आयुर्वेदामृतम्*

आंखों में सूखापन के कारण लक्षण और घरेलू उपाय

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श्री योग संजीवनी... *🌹आंखों में सूखापन के कारण लक्षण और घरेलू उपाय* 🌹आंख में सूखापन तब होता है जब आपकी आंसू ग्रंथियां (tear glands) पर्याप्त मात्रा में आंसू का उत्पादन नहीं करती है या आंसू जल्दी वाष्पित हो जाते हैं। *🌹आंखों की सूखापन के कारण* 👉🏻लंबे समय तक हवा या शुष्‍क हवा के संपर्क में रहना 👉🏻निष्क्रिय आंसू ग्रंथियां 👉🏻बढ़ती उम्र आंखों में कुछ है ऐसा लग रहा है 👉🏻लंबे समय तक आंख का न झपकना 👉🏻कांटेक्ट लैंस (contact lens) का उपयोग लंबे समय तक करना 👉🏻कम्‍प्‍यूटर स्‍क्रीन के सामने ज्‍यादा समय बिताना 👉🏻विटामिन A और विटामिन D की कमी होना *🌹आंखों में सूखापन के लक्षण* 👉🏻आपकी आंखों में चुभन और जलन का एहसास होना 👉🏻आपकी आंखों में दर्द हो रहा हो 👉🏻आंखे लाल और उनमें जलन (red and irritated) हो रही हों 👉🏻आंखों की धुंधली द्रष्टि (Blurry vision) 👉🏻आपकी आंख में या उसके आस-पास बलगम (mucus) आना 👉🏻तेज लाइट बरदास्‍त न कर पाना 👉🏻आंखे थकी थकी लगना 👉🏻आपकी दोनों आंखों में खरोंच आना *🌹आंखों के सूखापन को दूर करने के घरेलू उपाय* 🌹आंखों में ...

वेग रोकने से होने वाले रोग

श्री योग संजीवनी... *🌹वेग रोकने से होने वाले रोग🌹*  *🌹भूख रोकने से होने वाले रोगः* 🌻🍀 *अंगभंगारूचिग्लानिकार्श्यशूलभ्रमाः क्षुधः* भूख रोकने से, भूख लगने पर भी न खाने से शरीर टूटता है, अरुचि, ग्लानि और दुर्बलता आती है। इसके अलावा पेट में शूल-दर्द होता है और सिर में चक्कर आते हैं। पेट में जब दर्द हो तब यह जानने की कोशिश करनी चाहिए कि यह दर्द अजीर्ण के कारण तो नहीं है? यह दर्द अजीर्ण के कारण हो और उसे भूख के कारण होने वाला दर्द मानकर अधिक भोजन करने पर परिस्थिति बिगड़ जाती है।  *🌹प्यास रोकने से होने वाले रोगः* 🌻🍀 *शोषांगसादबाधिर्यसम्मोहभ्रमह्रदगदाः* ।  *तृष्णाया निग्रहात्तत्र* ..... प्यास रोकने से मुखशोष (मुँह का सूखना), शरीर में शिथिलता, अंगों में कार्य करने की अशक्ति महसूस होना बहरापन, मोह, भ्रम, चक्कर आना, आँखों में अन्धापन आना आदि रोग हो सकते हैं। शरीर में धातुओं की कमी होने से हृदय में भी विकृति हो सकती है।  *🌹खाँसी रोकने से होने वाले रोगः*  *🌻🍀कासस्य रोधात्तद् वृद्धिः श्वासारूचिहृदामयाः* ।  *शोषो हिध्मा च.* .... खाँसी को रोक...

बेल के औषधीय गुण

श्री योग संजीवनी... 🍈🍐🍈🍐🍈🍐🍈 *बेल के औषधीय  गुण* बेल एक फल है। जिसमे भरपूर मात्रा में केल्शियम, फास्फोरस, विटामिन, फाइबर, प्रोटीन और आयरन जैसे पोषक तत्त्व होते है। बेल में कई औषधिय गुण है जो की कब्ज, अपच, बवासीर, मधुमेह, कैंसर, साँस की समस्या, पेचिश, दस्त, सुजन आदि रोगों से आराम दिलाता है। बेल गर्मी के मौसम में मिलने वाला ये फल गर्मी से तो राहत दिलाता ही है साथ ही स्वास्थ्य की कई समस्यों से निजात दिलाता है। दिन में एक बार बेल का शर्बत पीते है तो आप हमेशा रोग मुक्त रहेंगे। बेल ऊपर से कठोर और अंदर से पीले रंग का गूदा होता है। गूदा लसादर और चिकना होता है। इससे नारयल की तरह फोड़ना पड़ता है। आइये जानते है इसके स्वास्थ्य लाभ के बारे में। *मधुमेह* 15 पत्ते बेलपत्र और 5 कालीमिर्च पीसकर चटनी बनाकर, एक कप पानी में घोलकर पीने से मधुमेह ठीक हो जाता हैं। यह लम्बे समय एक दो साल लेने से स्थायी रूप से मधुमेह ठीक हो जाता हैं। नित्य प्रात: बेलपत्र का रस 30 ग्राम पीने से भी लाभ होता हैं। *बगल दुर्गन्ध दूर करने हेतु* बिल्व की पत्तियों का रस कुछ दिनों तक बगल में लगाने से दुर्गन्ध द...

ग्रीष्म विशेष

श्री योग संजीवनी... *🌻ग्रीष्म विशेष🌻* *🌹गर्मीनाशक शरबतः🌹* 🌻🍀जीरा, सौंफ, धनिया, काली द्राक्ष अथवा किशमिश व मिश्री समभाग लेके कूटकर मिला रखें। एक चम्मच मिश्रण एक ग्लास ठंडे पानी में भिगो दें। 2 घंटे बाद हाथ से मसलकर, छानकर पीयें। पीते ही शीतलता, स्फूर्ति व ताजगी आयेगी।    *🌹गर्मी एवं पित्तजन्य तकलीफों में🌹*  🌻🍀रात को दूध में एक चम्मच त्रिफला घृत (त्रिफला घृत आयुर्वेदिक विश्वसनीय जगह से लेना चाहिए) मिलाकर पीयें। पित्तजन्य दाह, सिरदर्द, आँखों की जलन में आराम मिलेगा।     🌻🍀दोपहर को चार बजे एक चम्मच गुलकंद धीरे धीरे चूसकर खाने से भी लाभ होता है।    *🌹लू से बचने हेतुः🌹* 🌻🍀गुड़ (पुराना गुड़ मिले तो उत्तम) पानी में भिगोकर रखें। एक दो घंटे बाद छान कर पीयें। इससे लू से रक्षा होती है।     🌻🍀प्याज और पुदीना मिलाकर बनायी हुई चटनी भी लू से रक्षा करती है।      *🌹ग्रीष्म में शक्तिवर्धक🌹*  🌻🍀ठंडे पानी में जौ अथवा चने का सत्तू, मिश्री व घी मिलाकर पीयें। सम्पूर्ण ग्रीष्म में शक्ति बनी रहेगी।

लो ब्लड प्रेशर के कारण

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श्री योग संजीवनी... *🌹लो ब्लड प्रेशर के कारण * ◻️◻️◻️◻️◻️◻️◻️◻️◻️ *1) इस रोग के मुख्य कारणों में दुर्बलता, अधिक उपवास, पौष्टिक भोज्य पदार्थों तथा जल की कमी है |* *2) शारीरिक व मानसिक परिश्रम की अधिकता, यक्ष्मा, मानसिक आघात, शरीर से अधिक रक्त बह जाना आदि हैं।* *3) लो ब्लड प्रेशर विटामिन बी तथा सी की कमी के कारण भी हो जाता है।* *4) गुर्दे तथा आंते पूरी तरह सक्षम न रहने से भी यह रोग सिर उठाने लगता है।* *5) यह जीवन से रूखापन तथा परिवारिक संबंधों में आत्मीयता की कमी हो जाने से भी हो जाता है।* *6) जो जीवन में निराश रहने लगे, अपने लक्ष्य में बार-बार असफल होता रहे, उसे भी निम्न रक्तचाप की तकलीफ हो सकती है।* *🌹लो ब्लड प्रेशर(लो बीपी) के लक्षण :* *1) इस रोग में रोगी की नब्ज धीमी और छोटी हो जाती है।* *2) रोगी थोड़ा सा परिश्रम करने से ही थक जाता है और उसे गश (चक्कर) आ जाता है।* *3) रोगी का श्वास फूलने लगता है|* *4) रक्त भार मापक यन्त्र द्वारा देखने पर रक्त चाप 110 से 30 तक हो जाता है। उचित चिकित्सा से जीवन आराम से कट जाता है,* *5) रोग पुराना होने पर सदैव सिरदर्द ब...

गाय का घी पृथ्वी का अमृत

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श्री योग संजीवनी... *🌹स्वास्थ्य व पर्यावरण सुरक्षा का अमोग उपाय – गाय का घी🌹* 🌻🍀देशी गाय का घी शारीरिक, मानसिक व बौद्धिक विकास एवं रोग-निवारण के साथ पर्यावरण-शुद्धि का एक महत्त्वपूर्ण साधन है |  *👉🏻इसके सेवन से* – १) बल, वीर्य व आयुष्य बढ़ता है, पित्त शांत होता है | २) स्त्री एवं पुरुष संबंधी अनेक समस्याएँ भी दूर हो जाती है | ३) अम्लपित्त (एसिडिटी) व कब्जियत मिटती है | ४) एक गिलास दूध में एक चम्मच गोघृत और मिश्री मिलाकर पीने से शारीरिक, मानसिक व   दिमागी कमजोरी दूर होती है | ५) युवावस्था दीर्घकाल तक रहती है | काली गाय के घी से वृद्ध व्यक्ति भी युवा समान हो जाता   है | ६) गर्भवती माँ घी – सेवन करे तो गर्भस्थ शिशु बलवान, पुष्ट और बुद्धिमान बनता है | ७) गाय के घी का सेवन ह्रदय को मजबूत बनता है | यह कोलेस्ट्रोल को नहीं बढाता | दही को   मथनी से मथकर बनाये गये मक्खन से बना घी ह्रदयरोगों में भी लाभदायी है | ८) देशी गाय के घी में कैंसर से लड़ने व उसकी रोकथाम की आश्चर्यजनक क्षमता है |  *👉🏻ध्यान दें:* घी के अति सेवन से अजीर्ण ...

सर्दी-जुकाम-खाँसी के उपाय

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श्री योग संजीवनी... *🌹सर्दी-जुकाम-खाँसी🌹* *🌹सर्दी-जुकामः🌹*  *🌻🍀पहला प्रयोगः*  गर्म दूध में 1 से 2 ग्राम पिसी सोंठ मिलाकर अथवा तुलसी के पत्ते का 2 से 10 मि.ली. रस एवं अदरक के 2 से 20 मि.ली. रस में एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो तीन बार लेने से सर्दी में लाभ होता है।  *🌻🍀दूसरा प्रयोगः*  5 से 10 ग्राम पुराना गुड़ एवं 2 से 10 ग्राम अदरक मिलाकर खाने से अथवा आधी कटोरी दूध में 2  से 10 ग्राम काली मिर्च और 1 से  5 ग्राम हल्दी उबालकर देने से सर्दी में लाभ होता है।  *🌻🍀तीसरा प्रयोगः*  शरीर ठण्डा होने पर बिना छिलके के भूने चने का पाउडर एवं सोंठ का पाउडर सूखा-सूखा घिसने पर शरीर में गर्मीआती है।  *🌻🍀चौथा प्रयोगः*  नींबू का रस गर्म पानी में मिलाकर रात को सोते समय पीने से सर्दी मिटती है।  *🌻🍀पाँचवाँ प्रयोगः*  रात के समय नित्य सरसों का तेल या गाय के घी को गुनगुना गर्म करके नाक द्वारा एक- दो बूँद लेने से नजला-जुकाम नहीं होता है व मस्तिष्क स्वस्थ रहता है।  *🌻🍀छठा प्रयोगः*  बड़ के कोमल पत्तों को...

गर्मी में पानी कमतरता की पूर्ति कैसे करें

श्री योग संजीवनी... *🌹गर्मी में पानी कमतरता की वजह से पेशाब में जलन होने के उपचार और घरेलु आयुर्वेदिक उपाय* ▫▫▫▫▫▫▫▫▫▫ *🌻पानी : पेशाब में जलन हो रही है तो सर्वप्रथम अपने शरीर में पानी की मात्रा बढ़ाएं। अधिक से अधिक मात्रा में पानी, जूस या सूप पिए ताकि मुत्र का प्रवाह बढ़ता रहे, जिससे इंफेक्शन बढ़ने का खतरा कम होगा। दिन में कम से कम 3 लीटर पानी अवश्य पीना चाहिए।  यह समझ ले के आपने इतना पानी पीना चाहिए की आपकी पेशाब का रंग हमेशा सफ़ेद होना चाहिए। पेशाब का रंग पीला या लाल होने का मतलब आप पानी कम पी रहे हैं।* *🌻नारियल पानी  : अगर पेशाब का रंग पीला है तो समझिए कि आप पानी कम पी रहे हो। ढेर सारा पानी पीने से बेक्टेरिया नष्ट होंगे। आप चाहे तो नारियल का पानी भी पी सकते हैं। इससे पानी की जरूरत तो पूरी होगी साथ में शरीर को कई सारे  मिनरल्स भी प्राप्त होगें। नारियल पानी में गुड़ और धनिया मिलाकर भी आप पी सकते हैं। इससे पेट की गर्मी कम होती है।* *🌹विटामिन सी  : विटामिन सी युक्त सिट्रस फलों का या फलों के रसों का सेवन करें जैसे अनानास, नींबू, मोसंबी, संतरा आदि। इन फलों म...

बार बार मुंह सूखने की समस्‍या के लिये घरेलू उपचार

श्री योग संजीवनी... *🌹बार बार मुंह सूखने की समस्‍या के लिये घरेलू उपचार* *🌹1.पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से मुंह में सलाइवा (लार) बनी रहती है जो मुंह को सूखने से रोकती है। पानी के साथ साथ फलों के ताज़े रस पीने की सलाह भी दी जाती है।* *🌻2.सौंफ में फ्लावोनाइड्स होते हैं जो लार के उत्पादन में सहायक हैं। सौंफ के कुछ दाने लेकर उसे चबाएं; इससे मुंह भी नहीं सूखेगा और मुंह से बदबू भी नहीं आएगी।* *🌹3.एक गिलास पानी में नीबू के रस की कुछ बूँदें और थोडा सा शहद लेकर अच्छे से मिलाएं और इसे पूरे दिन पीते रहें। इससे मुंह में लार बनती रहेगी और मुंह नहीं सूखेगा।* *🌻4. प्रतिदिन एक छोटा कप एलोविरा जूस पीने से मुंह में लार बनी रहती है और इस प्रकार मुंह सूखने की समस्या नहीं होती।* *🌹5.अपने सलाद या सूप पर लाल मिर्च छिडकें। इससे लार का उत्पादन अधिक मात्रा में होता है और मुंह सूखता नहीं है।* *🌻6. जब भी आपको मुंह सूखा लगने लगे तब एक या दो इलायची के दाने चबाएं। इससे मुंह सूखेगा नहीं।* *🌹7.सलाइवा को उत्तेजित करने के लिए और मुंह को सूखने से बचाने के लिए अदरक एक उत्तम घरेलू उपचार है। जब भी...

नाखूनों फंगल इन्फेक्शन ठीक करने घरेलू उपाय

श्री योग संजीवनी... *🌹नाखूनों फंगल इन्फेक्शन ठीक करने घरेलू उपाय* *🌹नाखूनों में इंफेक्शन का  लक्षण* 👉🏻 नाखून मोटे होना। 👉🏻 नाखूनों का भंगुर होना, बिखरना या टुकड़े होना। 👉🏻  आकार में विकृत 👉🏻 नाखूनों की चमक खोना 👉🏻  पीला पन आना या काला दाग होना।  👉🏻  संक्रमित नाखून जड़ से भी अलग हो सकते हैं। *🌹आयुर्वेदिक उपचार* 🌻नींबू के ताज़ा रस  इंफेक्शन वाले नाखून पर लगाएं और कुछ देर बाद उसे गर्म पानी से धोकर साफ कर लें। 🌻लहसुन से नाखूनों का संक्रमण ठीक किया जा सकता है। इसमें एंटी फंगल गुण होते हैं जिससे दोबारा बैक्टीरिया नहीं पनपते हैं। कुछ लहसुन की कलियाँ लें इसे अच्छे से पेस्ट कर लें। फिर इसमें वाइट विनगर मिलाएं। अब इस मिश्रण में अपने नाखूनों को 10-20 मिनट के लिए भिगोएं। इसे रोज़ करने से संक्रमित नाखून ठीक होजाएंगे। 🌹हमेशा अपने हाथों और नाखूनों को गर्म पानी से धोए क्योंकि गर्म पानी से डेड स्किन निकल जाती है जिससे नाखूनों में संक्रमण नहीं होता है यही नहीं गर्म पानी से ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहता है। अब इसके लिए गर्म पानी में थोड़ा सा...